दुर भविष्यका मधेश, समृद्ध मधेश


दुर भविष्यका मधेश एक समृद्ध मधेश है। पुर्व पश्चिम बिजली रेल है, बुलेट ट्रेन। चीनके बेइजिंगसे ल्हासा होते, सिक्किमके रास्ते ये ट्रेन तराईमें मेचीसे महाकाली जाती है, और उससे आगे दिल्ली पहुँचती है। भारतकेजो उत्तर पुर्वके लोग हैं उन्हें दिल्ली जाना हो तो वो इसी रास्ते जाते हैं। ये बुलेट ट्रेन ६०० मील, यानि १,००० किलोमीटरका ये रास्ता तीन घंटेमें पार करती है।

पुरानावाला महेन्द्र राजमार्ग फोर लेन टु वे हाईवे बन गया है। हुलाकी राजमार्ग भी फोर लेन टु वे हाईवे बन गया है। ढेर सारे उत्तर दक्षिण रोड हैं। मधेशके प्रत्येक बस्तीतक सालमें १२ महिने चल्नेवाली पक्की सड़क है। मधेशमें उगाए गए सब्जियाँ युरोप तक पहुँचती है।

ये जो प्रमुख सड़के बनी, रेल लाइन बिछी, वो सब BOOT (Build Own Operate Transfer) के सिद्धांत पर, विश्व पुंजी बाजारसे पैसा लाकर।

अभी जिस तरह सब जगह FM रेडियो है, भविष्यके मधेशमें सब जगह वायरलेस इंटरनेट उपलब्ध है और उसके लिए नेपाल सरकार या मधेश सरकारको कुछ करना भी न पड़ा। Google और Facebook ने आकाशसे drone के माध्यमसे वो मुफ्तमें ला दिया। वैसे सब जगह Fiber Optic नेटवर्क बिछाया गया है। कंप्यूटर बिज्ञानमे पारख मधेसी युवा मधेशमें बैठके दुनिया भर बिज़नेस व्यापार करते हैं और उससे देश और राज्यको बहुत टैक्स मिलती है।

मधेशमें भी एक औद्योगिक क्रान्ति होती है, लेकिन वो अमेरिका, ब्रिटेन या चीनवाली गन्दी क्रान्ति नहीं बल्कि एक Clean Energy पर आधारित, क्यों कि नेपालमें ५०,००० मेगावाट बिजलीका उत्पादन हो गया है और मधेशके किसी भी फैक्ट्रीसे धुँवा निकलता ही नहीं। १० मेगावाटसे बड़ा सभी हाइड्रो प्रोजेक्टको केंद्रीय सरकारके मातहत रखा गया है, और इससे मधेशको बहुत नाफा हुआ है। सन २०१५ में सभी मधेसी पार्टी एक हो गए, लगभग १४ पार्टी, और उन्होने अपना नाम भी बदला, और पहाड़में भी उन्होने संगठन विस्तार किया। उस पार्टीने केंद्रमें अकेले अभी तक दो बार सरकार बना लिया है।

दक्षिण एशियाका आर्थिक एकीकरण भी हो गया, और हिंदीको UN का छठा भाषा भी मान लिया गया। भारत और पाकिस्तानके बीच जबसे बॉर्डर खोल देने तककी शान्ति आ गयी तबसे पुरी दक्षिण एशिया आर्थिक रूपसे यूरोपसे प्रतिस्प्रधा कर रही है।

इतना २० सालके अंदर किया जा सकता है।

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