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सीके राउत के दो फेसबुक पोस्ट

अगर बात समानुपातिक समावेशी की है तो मधेस के जो (लालु के शब्द में) भुराबाल हैं वो तो पहाड़ के बाहुन क्षेत्री से कम नहीं। लेकिन पहाड़ के बाहुन क्षेत्री ने अपने आप को चालाकी से खस के साथ एक क्लस्टर बना लिया है। खस को आरक्षण की जरुरत है लेकिन बाहुन क्षेत्री को नहीं। उसी तरह मधेस के भुमिहार, राजपुत, बाभन, लाला को आरक्षण की जरुरत नहीं है। जिन्हें है उन्हें है।

तो जातपात का जो सामाजिक यथार्थ है उस पर विश्लेषण जरुरी है। उसके आध्यात्मिक पक्ष पर विश्लेषण जरुरी है। सिर्फ मधेसी का देश बनाते हैं तो फिर वहाँ भी अगर बिभेद ही हुवा तो मधेसी का अलग देश बनाना बिभेद का समाधान नहीं है, क्या ये प्रमाणित नहीं होता?

सीके राउत को लड़ाइ वाक स्वतंत्रता र मानव अधिकार का लागि हो भने ठीक छ।  सीके को मानव अधिकार अवश्य हनन भएको छ। तर सीके को घोषित लड़ाइ त मधेसी ले समानता पाउनुपर्छ भन्ने हो। त्यस घोषित लड़ाइ का बारे मा सीके को विश्लेषण अपुर्ण छ, घोषित लक्ष्य सम्म पुग्ने कुनै रोडमैप नै छैन। भएको विश्लेषण र रोडमैप बारे व्यापक छलफल र तर्क वितर्क भएकै छैन। लोकतान्त्रिक बहस त कदम कदम मा हुनुपर्छ।

सीके ले सारेको रोडमैप अपुर्ण …

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