शहीद नहीं चाहिए



तीसरी मधेसी क्रान्तिकी तैयारी हो रही है। राजा ज्ञानेन्द्रके तानाशाहीके विरुद्ध एक ही लोकतान्त्रिक क्रान्ति पर्याप्त रही, लेकिन मधेसीयोको अपना अधिकार पानेके लिए एक नहीं, दो नहीं, तीन तीन क्रान्ति करने पड़ रहे हैं। मधेसीयोको जिस विभेदका सामना करना पड़ रहा है वो कितनी जटिल है इसीसे मालुम हो जाता है। बहुत जटिल है मुद्दा। 

अबकी क्रान्ति अन्तिम होनी चाहिए। इस बारकी क्रान्तिमें कोइ शहीद नहीं चाहिए। 
  1. सीके राउतको अविलम्ब और निशर्त रिहा करो। 
  2. मधेश प्रदेशकी स्वयत्तताकी गारण्टी दो। २२ जिल्ला हमारा है। उसमें एक या दो प्रदेश होंगे। लेकिन २२ मेंसे कोइ भी जिल्ला किसी पहाड़ी राज्यको नहीं दिया जा सकता। 
  3. आत्म निर्णयके अधिकार सहितकी संघीयताकी गारण्टी दो। राज्यकी संसद बहुमतके आधार पर जनमत संग्रह करा सकती है। उस जनमत संग्रहमें बहुमतके आधार पर नए देशका घोषणा किया जा सकता है। 
लेकिन क्रान्तिके दौरान अगर एक भी शहीद हुए तो एक चौथी माँग थपी जाएगी: गृह मंत्रीका राजीनामा। क्यों कि शहीद बहुत दे चुके हम। अब और एक भी शहीद देनेकी ख्वाइश नहीं है। अगर दशसे ज्यादा शहीद होते हैं तो फिर बात बढ़ जाएगी। तब तो ये क्रान्ति प्रधान मंत्रीके राजीनामाके बगैर नहीं थमनेवाली। 


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