धर्म निरपेक्षता मधेस के हिन्दु को खुद अपने लिए चाहिए

मधेस के हिन्दु भ्रम में हैं। कुछ सोंच रहे हैं धर्म निरपेक्षता तो आ गया है। कुछ सोंच रहे हैं चोर दरवाजे से हिन्दु राज्य कह दिया तो क्या हुवा, हम भी तो हिन्दु हैं। कौन सा दंगा फसाद हो रहा है देश में। सब मिलजुल के ही तो रह रहे हैं।

अरे कहाँ हिन्दु राज्य कहा है? हिन्दु तो हटाया है। उतने हटाने के लिए १७,००० को मार दिया। हिन्दु हटा के सनातन धर्म रखा गया है। ये Old Testament, New Testament वाली बात हो गयी।

विद्या ने जानकी मंदिर में आ के जो किया वो कोई हिन्दु कर ही नहीं सकता। वो राज सिंहासन पर बैठ गयी है। राम रूप धारण किए जो हैं वो खड़े हैं। राम को कहा जा रहा है विद्या को प्रणाम करो। ऐसा भी होता है क्या?

ओली बैठा है। उसका बाप उठ के टीका लगा रहा है। ये तो सनातनी भी नहीं हैं। देश रावण राज्य युग में पहुँच गया लगता है।

धर्म निरपेक्षता मधेस के हिन्दु को खुद अपने लिए चाहिए। ये भ्रम में न रहे कि मधेस को मुसलमान या पहाड़ के जनजाति को चाहिए। उनको भी चाहिए आप को भी।

धर्म निरपेक्षता कोई धर्म  विरोधी चीज नहीं है। सिर्फ ये कहा जा रहा है कि राज्य का धर्म से सम्बन्ध नहीं होता। कोई कहेगा संसद का अगला सत्र हम जानकी मंदिर में आ के करना चाहते हैं तो आप क्या कहेंगे? कि जानकी मंदिर के भितर राजनीति नहीं होती। संसद का मीटिंग यहाँ नहीं बुलाया जाता।

राज्य का काम है न्याय सुरक्षा, स्कुल अस्पताल आदि इत्यादि। धर्म कर्म राज्य का काम नहीं।


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