मधेसी मोर्चा के मांग में दो छुट गए हैं

देशके संविधान में से हिन्दु धर्म को हटा कर उस जगह पर सनातन धर्म को लिखने के लिए १७,००० को मार दिया देखो। तो देश को तो धर्म निरपेक्ष होना है। धर्म निरपेक्षता मधेस के हिन्दु को भी चाहिए, मुसलमान को भी, और पहाड़ के जनजाति को भी। मधेसी कहते हैं जनजाति जग क्यों नहीं रहे हैं? धर्म निरपेक्षता को एजेंडा आइटम बनाओ, देखो किस तरह जगते हैं। धर्म निरपेक्षता का लॉजिक बहुत सिंपल है। धर्म निरपेक्षता के बगैर आधुनिक लोकतंत्र नहीं। आधुनिक लोकतंत्र के बगैर आर्थिक क्रांति नहीं। 

दुसरा है मधेसी महिला के सम्बन्ध में। मधेसी मोर्चा के जो पुरुष नेता लोग हैं वो सोंच रहे हैं बाघ को ऊँगली खिला दो तो शायद हाथ नहीं खाएगा। सब खा गया तब कह रहे हैं शायद नहीं खाएगा। आधुनिक लोकतंत्र में सब नागरिक बराबर होते हैं। अगर A क्लास, B क्लास नागरिकता का प्रावधान है तो वो एक आधुनिक लोकतंत्र नहीं। और बगैर आधुनिक लोकतंत्र के आर्थिक क्रांति नहीं। और ये आर्थिक क्रांति का मुद्दा बाद में है पहले तो महिला अधिकार और भारत के साथ अद्वितीय सम्बन्ध की बात है। जो कहता है भारत फरक देश है वो जाओ चीन जाओ भुटान जाओ। मधेसकी बहु देश के किसी भी पद की आकांक्षा कर सकती है। क्यों नहीं कर सकती? 



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