नेपाल के शासक: ये हैं आखिर कौन?

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English: A Map of the spreading of Homo sapiens over the world, adapted from file Spreading homo sapiens.svg" and translated to Hebrew" (Photo credit: Wikipedia)
ये अपने आप  को खस आर्य कहते हैं लेकिन ये खस नहीं हैं, ये आर्य हैं, खस नहीं। अपना संख्या बढ़ाने के लिए खस आर्य बोलते हैं। नेपाली इनका भाषा नहीं। ये ब्राह्मण हैं। लेकिन दानव ब्राह्मण। राजपाठ करने वाला, कुछ उस टाइप का। ये दक्षिण भारत से भाग के आए।

देखो मेरा हिस्ट्री का नॉलेज उतना नहीं है। तो मेरे को गेस करने पड़ रहे हैं। जो इतिहासविद हैं वो enlighten करो।

सीके राउत ने कहा लोहांग सेन तो मेरे को लगा वो, लोहांग सेन। मैंने उससे पहले नाम नहीं सुना था। लोहांग सेन। शशि ठरूर ने ऑक्सफ़ोर्ड में स्पीच दिया तब मेरे को पता चला पहली बार की बंगाल के अनिकाल में इतने लोग मरे। चर्चिल तो हिटलर का बाप निकला।

मधेस के इतिहास का नॉलेज मेरा कितना है मैं बताता हुँ। राजा जनक मालुम है। मेरे घर के छत पर चढ़ जाओ तो जानकी मंदिर दिखता है। तो लड्डु पेड़ा खाते खाते राजा जनक कंठस्थ। उसके बाद एक गैप है। नदी जब चुरिया पहाड़ काटती है  तो एक भावर प्रदेश आता है, मधेसी कहते हैं wasteland ---- बालु गिट्टी। आपने चुरे भावर वालों का नाम सुना होगा। Desperate लोग हैं, उसी wasteland में आ के बस गए हैं। भावर प्रदेश अलग राज्य बना दो तो वहाँ ड्रिंकिंग वाटर का प्रॉब्लम हो जाएगी। तो क्या होता है कि चुरिया क्रॉस करने का बाद नदी गायब हो जाती है। अंडरग्राउंड चली जाती है। फिर चार पाँच किलोमीटर के बाद ओवरग्राउंड आ जाती है। तो मेरा नदी राजा जनक के बाद अंडरग्राउंड चली जाती है और ओवरग्राउंड आ जाती है सीधे गजेन्द्र नारायण सिंह पर। वो एक गैप है छोटामोटा।

तो फिर मैं मधेसी राइट्स के लिए क्यों और कैसे बोलता हुँ? ह्यूमन राइट्स चार्टर के बल पर, एक व्यक्ति एक मत। मधेसी Homo Sapiens हैं इस लिए बराबर है। बराबरी मिलनी चाहिए।

तो ये जो नेपालके शासक हैं ये हैं कौन? इनके व्यवहार से मैं गेस कर रहा हुँ। जब मनमोहन सिंह के बाद मोदी आता है तो थोड़े कोई कहता है देश बदल गया? तो इन लोगों के लिए भारत में मुग़ल का आना कुछ वैसा ही था। एक ही देश में दुसरा शासक आ गया। यानि कि ये भारतीय नहीं थे। मुघल से पहले भी ये लोग भारतीय नहीं थे। भारत का ओरिजिनल नाम है मध्य देश। जो लोग साउथ में थे वो भारतीय नहीं थे। भारत वहाँ तक था ही नहीं। रामायण में ही देख लो। जब राम दक्षिण पहुँचते है तो वर्णन ही बदल जाता है। लेकिन ये लोग तमिल के तरह द्रविड़ियन भी नहीं। हिन्दु थे कट्टर, ब्राह्मण थे, आर्य थे लेकिन भारतीय नहीं थे। देखो मैं गेस कर रहा हुँ। मैं कोई तथ्य नहीं परोस रहा। रामायण में दक्षिण के लोग को डेमोनाइज़ किया गया है, less than human के रूप में वर्णन किया गया है। तो मेरे को लगता है मुग़ल के आने से पहले भी भारत के लोग, उस समय के भारत के लोग इन्हे हेय दृष्टि से देखते रहे होंगे। जब मुग़ल आए तो इन्हें नहीं लगा ये नया देश है। इन्हे लगा वही पुराना वाला भारत है सिर्फ प्राइम मिनिस्टर बदल गया है। लेकिन मुगलों ने इन्हे खदेड़ा। लेकिन मुग़ल पुरे दक्षिण नहीं गए। It was not worth it. कि उधर wasteland है कौन जाएगा। मुघल नेपाल में हिमालय पर्वत तक भी नहीं गए। उन्हें थोड़े लगा कि तपस्या होता है उधर, शंकर रहते हैं। उन्हें लगा wasteland है कौन जाएगा। यानि कि ये लोग एक्सट्रीम साउथ के भी नहीं हैं। होते तो मुग़लों को पता भी नहीं चलता। और ये दक्षिण के तरफ नहीं भागे क्यों की ये द्रविड़ियन नहीं थे। और राज ठाकरे के घराने से भी नहीं। ठाकरे थोड़ा उत्तर हो गया।

मेरे को सदैव लगता था कि ये एक अजीब समुदाय है। इनमे ब्राह्मण है क्षेत्री है लेकिन वैश्य नहीं। तो क्षेत्री भी इन्होने नेपाल में आने के बाद यहाँ के गैर हिन्दु राजा जो थे स्थानीय अनपढ़ गवार सब उनको पुरस्कार स्वरुप क्षेत्री बनाते गया। अपना गुंजायश करने के लिए और हैकम चलाने के लिए। कि तुम्हे क्षेत्री हम ही बना सकते हैं। मैं गेस कर रहा हुँ। हुवा क्या होगा कि इनके क्षेत्री मारे गए होंगे। वैश्य को कौन मारता है? मुघलों को रहा होगा कि व्यापार करते रहो अब टैक्स हमें दो। और ये ब्राह्मण लोग तपस्या करने बहाने जंगल के रस्ते से आहिस्ता अपना खिसक गए होंगे। वेद पुराण के माध्यम से इन्हें हिमालय पर्वत के बारे में मालुम था। तो ये रवाना हुवे। सीरिया से लोग टर्की के रास्ते जर्मनी तक पहुँच जाते हैं। वो भी पैदल। बाल बच्चा सहित।

ये भारतीय नहीं थे। इन्हें लगा भारत में कोई नया प्राइम मिनिस्टर आया जिसने हमारे इलाके में आ के हमें भगाया। जब की भारतीय का इतिहास वैसा नहीं है। भारतीय कहते हैं मुघल ने आ के हमें colonize किया। लेकिन भारतीय मुसलमान वैसा नहीं बोलते। कहते हैं मुग़ल ने राज किया।

तो ये लोग हिन्दु थे, आर्य थे, ब्राह्मण थे कट्टर, लेकिन भारतीय नहीं थे। पशुपतिनाथ में अभी भी दक्षिण भारत का मुख्य पुजारी रखा जाता है। तो पता करो।

इनके नेपाल में आने के कुछ सौ साल बाद, after a few hundred years, अंग्रेज दिखाई पड़े। तो इन्हे लगा भारतीयों से बदला सधाने का ये अच्छा मौका है। जम के मदत की। अभी भी भारतीय के प्रति के एक racist hatred type का feeling है इनके दिल में। ये अपने आप को हिन्दु मानते हैं, आर्य मानते हैं, लेकिन भारतीय नहीं मानते। ये कभी भी इतिहास में भारतीय रहे ही नहीं।

अगर मैं हजारों साल पुराने राजा जनक को अपना क्लेम करता हुँ तो ये लोग ६०० साल पुराना इतिहास की याद ताजा रखे हुवे हैं तो इसमें शायद आश्चर्य की बात नहीं।

लेकिन कोई इन्हे समझाओ कि ये अब एक मॉडर्न स्टेट बनने जा रहा है। मधेसी अधिकार मांग नहीं रहा है। मधेसी संविधान लागु करने नहीं दे रहा है। जब तक संविधान लागु होगा ही नहीं तब तक इन लोगों को भी कोई अधिकार मिलेगा नहीं। तो ये लोग गलतफहमी में न पड़े। कि मधेसी हमसे अधिकार मांग रहे हैं।



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